नैनीताल: सरोवर नगरी में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप और जलस्रोतों की अनदेखी से नैनी झील की सेहत बिगड़ रही है। कभी शहर के प्राकृतिक जलधाराओं से भरने वाली झील अब पूरी तरह बारिश पर निर्भर होती जा रही है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो झील का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है, जिससे पर्यटन उद्योग पर भी बड़ा असर पड़ेगा।
झील रिचार्जिंग के आधार सूख रहे हैं!
- नैनीताल में पहले 16 प्राकृतिक जलस्रोत थे, जिनमें से 4 पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं।
- 8 जलस्रोतों का उपयोग अभी भी पेयजल के लिए होता है, लेकिन पानी की मात्रा लगातार घट रही है।
- जलागम क्षेत्र के सूखने से झील में गाद (सिल्ट) की समस्या गंभीर हो रही है, जिससे झील की जलधारण क्षमता प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: समय रहते नहीं संभले तो होगा बड़ा नुकसान
पर्यावरणविद् डॉ. कपिल जोशी के अनुसार, झील के आसपास मौजूद जलधाराओं के संरक्षण के बिना नैनी झील को बचाना मुश्किल होगा। जलस्रोतों के सूखने से झील में केवल वर्षा जल का संग्रहण हो रहा है, जो टिकाऊ समाधान नहीं है।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता रमेश गर्ब्याल ने बताया कि पालिका ने 11 जलस्रोतों के पुनर्जीवन के लिए बजट जारी किया था, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में देरी हुई। अब अप्रैल के पहले सप्ताह से काम शुरू होगा।
प्राकृतिक जलस्रोतों के बिना नैनीताल कैसे बचेगा?
- 22 प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण अनिवार्य
- गाद जमा होने से रोकने के लिए झील किनारे मिट्टी कटाव को कम करने की जरूरत
- पूजा सामग्री और कचरा डालने की परंपरा पर रोक
पालिकाध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल ने कहा कि जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने और सफाई के लिए ठोस रणनीति बनाई जा रही है।
क्या केवल पुनरुद्धार ही पर्याप्त है?
‘ग्रीन आर्मी’ के संस्थापक जय जोशी ने कहा कि जलस्रोतों का केवल जीर्णोद्धार करने से काम नहीं चलेगा, नियमित रखरखाव और जागरूकता अभियान भी जरूरी हैं।
अब सवाल यह है:
अगर समय रहते ठोस प्रयास किए गए तो नैनीताल की झील और जलस्रोतों को बचाया जा सकता है, वरना आने वाली पीढ़ियों को केवल सूखी झील और सूखे स्रोत ही देखने को मिलेंगे।