देहरादून: हरिद्वार को छोड़ राज्य के शेष 12 जिलों में हाल ही में संपन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के बावजूद 4792 ग्राम पंचायतों का गठन नहीं हो सका है, जिससे गांवों के विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
दरअसल, 4772 ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत सदस्यों के दो-तिहाई पद रिक्त रह गए, जबकि 20 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के लिए चुनाव ही नहीं हो पाया। इस कारण निर्वाचित प्रधान भी पदभार ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं।
वर्तमान स्थिति
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कुल पंचायतें : 7499
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गठित पंचायतें : 2707
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बिना गठन वाली पंचायतें : 4792
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रिक्त पद : 33,490
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ग्राम पंचायत सदस्य : 33,468
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ग्राम प्रधान : 20
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क्षेत्र पंचायत सदस्य : 02
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आगे की तैयारी
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राज्य निर्वाचन आयोग ने शासन से रिक्त पदों का जिलेवार ब्योरा मांगा है।
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संभावना जताई जा रही है कि 20 सितंबर तक उपचुनाव कराए जा सकते हैं।
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सूत्रों के मुताबिक, 6 सितंबर को जिला पंचायतों में शपथ ग्रहण के बाद उपचुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने कहा,
“त्रिस्तरीय पंचायतों में रिक्त पदों पर उपचुनाव के दृष्टिगत शासन से जिलेवार जानकारी मांगी गई है। उच्च स्तर पर विमर्श के बाद शीघ्र ही उपचुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।”
यानी आने वाले दिनों में उत्तराखंड की हजारों ग्राम पंचायतों में उपचुनाव की सरगर्मी देखने को मिलेगी, जिससे गांवों का विकास कार्य फिर से पटरी पर लौट सकेगा।
