देहरादून : शारदीय नवरात्रि की नवमी पर कन्या पूजन के बीच उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासत फिर गरमा गई है। उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने दुष्यंत गौतम के सिक्किम के राज्यपाल पद की शपथ लेने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अंकिता के परिवार को न्याय की प्रतीक्षा है, तब ऐसे घटनाक्रम जनभावनाओं को आहत करते हैं।
गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि एक ओर देशभर में कन्याओं को देवी मानकर उनके चरण पूजे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी के मामले में न्याय और कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंकिता केवल उत्तराखंड की नहीं, बल्कि पूरे देश की बेटी थी। उसकी हत्या ने समाज को झकझोर दिया था और उसके परिवार को न्याय मिलने की अपेक्षा आज भी बनी हुई है।
‘न्याय व्यवस्था पर भरोसा कायम रखना सरकार की जिम्मेदारी’
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि किसी व्यक्ति को संवैधानिक पद दिए जाने का मुद्दा ही नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था से जुड़े जनविश्वास का सवाल भी महत्वपूर्ण है। जब किसी पीड़ित परिवार के मन में सवाल हों, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि उनकी पीड़ा सुने और मामले से जुड़े संदेहों पर पारदर्शी जवाब दे।
उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय का भरोसा दिलाने और प्रकरण से जुड़े सवालों का निष्पक्ष समाधान करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। उन्होंने मामले से संबंधित सभी संदेहों की निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
‘नारी को पूजन नहीं, सुरक्षा चाहिए’
गरिमा मेहरा दसौनी ने दुष्यंत गौतम के राज्यपाल पद की शपथ लेने के दिन को लोकतांत्रिक मूल्यों और न्याय की अपेक्षा रखने वाले नागरिकों के लिए काला दिन करार दिया। यह कांग्रेस प्रवक्ता की राजनीतिक प्रतिक्रिया है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि में कन्या पूजन तभी सार्थक होगा, जब बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को केवल पूजने की नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल और न्याय की जरूरत है। कांग्रेस ने इस बयान के जरिए अंकिता भंडारी प्रकरण में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग दोहराई है।

