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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: सरकार की हार या बड़ा राजनीतिक दांव? इन 4 वजहों से बदल गया पूरा खेल

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TMP: 35 दिनों तक चले नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को विपक्ष अपनी बड़ी जीत बता रहा है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या यह फैसला सरकार की हार नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक चाल थी। कई राजनीतिक संकेत बताते हैं कि इस एक फैसले से केंद्र सरकार ने एक साथ कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।

1. आंदोलन की धार को समय रहते कुंद किया?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में शुरू हुआ आंदोलन तब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इसमें शामिल हुए। बाद में सरकार और वांगचुक के बीच बातचीत के बाद उनका अनशन समाप्त हुआ। इसके बाद आंदोलन का नेतृत्व फिर CJP के हाथ में आ गया।

2. क्या नया राजनीतिक विकल्प बनने से पहले ही रोक दिया गया?

राजनीतिक गलियारों में इस आंदोलन की तुलना 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन से भी होने लगी थी, जिसके बाद आम आदमी पार्टी का गठन हुआ। ऐसे में यह चर्चा भी रही कि यदि आंदोलन लंबा चलता तो वह भविष्य में किसी नए राजनीतिक विकल्प का आधार बन सकता था। हालांकि यह एक राजनीतिक आकलन है, स्थापित तथ्य नहीं।

3. युवाओं के संदेश को स्वीकार करने की कोशिश?

पेपर लीक मामले में सरकार पहले ही सीबीआई जांच, गिरफ्तारियों और परीक्षा सुधार की घोषणा कर चुकी थी। इसके साथ फास्ट ट्रैक कोर्ट, कड़े कानून और परीक्षा प्रणाली में सुधार जैसे प्रस्ताव भी सामने आए। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है कि सरकार छात्रों की नाराजगी को गंभीरता से ले रही है।

4. विपक्ष के मुद्दे की धार कम करने की रणनीति?

विपक्ष लगातार सरकार को छात्रों के मुद्दे पर घेर रहा था। इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त होने की घोषणा ने इस मुद्दे की राजनीतिक तीव्रता को काफी हद तक कम कर दिया। इससे सरकार को अगले चुनावी राज्यों से पहले नुकसान सीमित करने का अवसर मिल सकता है।

राजनीतिक बहस जारी

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अलग-अलग राजनीतिक दलों द्वारा अलग नजरिए से देखा जा रहा है। विपक्ष इसे जनदबाव की जीत बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष इसे जवाबदेही और परीक्षा सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बता सकता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इस फैसले का राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था पर कितना व्यापक असर पड़ता है।

 
 
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