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आस्था और विकास का संगम: उत्तराखंड में धार्मिक-सांस्कृतिक परियोजनाओं को मिल रही नई रफ्तार

 

 

 

देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में आध्यात्मिक विरासत को सहेजने और आधुनिक विकास से जोड़ने की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के रेंजर्स ग्राउंड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शिरकत करते हुए राज्य में चल रही धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक दिशा देने वाले मंच हैं। इस दौरान उन्होंने कथा व्यास देवकीनंदन ठाकुर के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें भक्ति और अनुशासन का प्रेरक उदाहरण बताया।

धार्मिक परियोजनाओं को मिल रहा विस्तार

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में केदारखंड और मानसखंड क्षेत्रों के मंदिरों के सौंदर्यीकरण पर तेजी से कार्य हो रहा है। इसके साथ ही हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार और हरिद्वार-ऋषिकेश तथा शारदा कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने की दिशा में अहम साबित होंगी।

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संस्कृति और शिक्षा का नया केंद्र

राज्य में सांस्कृतिक अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना की गई है। मुख्यमंत्री ने इसे भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन और इतिहास के अध्ययन को नई दिशा देने वाला कदम बताया।

कानूनी सुधारों पर जोर

मुख्यमंत्री ने राज्य में लागू समान नागरिक संहिता और धर्मांतरण विरोधी कानून को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ये निर्णय सामाजिक समरसता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर हैं।

‘न्यू इंडिया’ में सांस्कृतिक पुनर्जागरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को नई पहचान मिली है। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों से फिर जुड़ रहा है।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आगे भी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को सशक्त करने के लिए इसी तरह के प्रयास जारी रखेगी।

 
 
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