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दिल्ली रैली फ्लॉप, 2014 में ही जनता ने ‘वोट चोरों’ का मकसद कर दिया था पूरा: भाजपा

 

 

 

 

देहरादून: भाजपा ने कांग्रेस की दिल्ली रैली को पूरी तरह फ्लॉप बताते हुए तीखा हमला किया है। भाजपा ने कहा कि जिस उद्देश्य से कांग्रेस नेता दिल्ली में जुटे थे, उसे तो देश की जनता 2014 में ही वोट चोरों को सत्ता से बाहर कर पूरा कर चुकी है। अपनी लगातार हार की हताशा में कांग्रेस अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली देने की राजनीति पर उतर आई है, जिसे जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।

भाजपा नेताओं ने रैली में प्रधानमंत्री की मृत्यु की कामना किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसी मानसिकता को देवभूमि की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि उत्तराखंड की राष्ट्रवादी जनता 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर देगी

रैली पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों से उन्हें कोई सरोकार नहीं है, लेकिन जिस तरह रैली में पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और असहनीय नारे लगाए गए, वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अलग-अलग मंचों से 150 से अधिक बार अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर चुके हैं, जिनमें कई मामलों में कानूनी कार्रवाई भी चल रही है। इसके बावजूद पीएम की “कब्र खुदने” जैसे नारे लगाना बेहद निंदनीय है।

भाजपा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश ही नहीं, दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं और देवभूमि उत्तराखंड में तो वे जनता के दिलों में बसते हैं। आरोप लगाया गया कि पीएम के खिलाफ हो रहे ये हमले कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी की भाषा से प्रेरित हैं और इसके पीछे पार्टी आलाकमान की मौन सहमति भी दिखाई देती है। भाजपा ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से तत्काल सार्वजनिक माफी की मांग की है।

भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने कांग्रेस की रैली को संख्या और मुद्दों—दोनों ही दृष्टि से पूरी तरह नाकाम बताया। उन्होंने कहा कि जितने विधानसभा प्रभारी कांग्रेस ने बनाए और जितनी बार उनके प्रदेश नेता “दिल्ली दरबार” में हाजिरी लगाते रहे, उतनी संख्या में भी कांग्रेसी कार्यकर्ता रैली में नहीं पहुंच पाए। क्योंकि उत्तराखंड की जनता जानती है कि जिस मुद्दे पर कांग्रेस ने दिल्ली बुलाया, वह तो 2014 में ही समाप्त हो चुका है

भाजपा नेताओं ने कहा कि देश की जनता ने आजादी के बाद लंबे समय तक चले कांग्रेस के शासन को 2014 में खत्म किया और उत्तराखंड में भी 2017 में कांग्रेस को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं को लगा वे रैली में जा रहे हैं, जबकि हकीकत में यह उनके “युवराज” के उस मुद्दे का शांति हवन था, जिसके बाद अब वे कार्यकर्ताओं को काम सौंपकर खुद छुट्टी पर निकल पड़े हैं।

 
 
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