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मोहन भागवत की एकता की अपील का मुस्लिम विद्वानों ने किया स्वागत, विपक्ष ने साधा निशाना

 

 

 

 



पीटीआई : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की एकता की अपील का मुस्लिम विद्वानों ने स्वागत किया है और कहा कि हिंदू-मुसलमानों के बीच गलतफहमियां दूर की जानी चाहिए। भागवत ने गुरुवार को कहा था कि इस्लाम का भारत में हमेशा स्थान रहेगा और हिंदू धर्म किसी भी अन्य धर्म का विरोध नहीं करता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरएसएस काशी और मथुरा को पुनः प्राप्त करने के किसी आंदोलन का हिस्सा नहीं बनेगा।

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा कि दोनों पक्षों की ओर से गलतफहमियां दूर की जानी चाहिए, वहीं मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि हमें अच्छे माहौल में देश को प्रगति के पथ पर ले जाना चाहिए।

भागवत ने ढाई घंटे के प्रश्नोत्तर सत्र में मनुस्मृति, एआई, टैरिफ, जाति, शिक्षा, देशभक्ति, विभाजन, घुसपैठ और मुसलमानों पर हमलों जैसे मुद्दों पर खुलकर जवाब दिए।

हालांकि, विपक्षी दलों ने उनके बयानों पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने कहा कि भागवत ने 75 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति को लेकर विरोधाभासी बयान दिए हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा—”एक महीना, एक व्यक्ति, दो विरोधाभासी बयान।” वहीं राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने पूछा कि आखिर पर्दे के पीछे ऐसा क्या हुआ कि भागवत को बयान बदलना पड़ा।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि आरएसएस से जुड़े संगठन ही मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं और मोदी सरकार के दौर में इस नफरत को संस्थागत रूप दिया गया है।

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