TMP: उत्तराखंड सरकार शहीदों और सैनिकों के सम्मान में एक के बाद एक ऐतिहासिक निर्णय ले रही है। वीरभूमि उत्तराखंड में जल्द ही भव्य ‘सैन्य धाम’ (शौर्य स्थल) अस्तित्व में आ जाएगा। इसका निर्माण अंतिम चरण में है। इस स्थल की विशेष बात यह है कि इसमें प्रदेश की 28 नदियों का जल और शहीदों के घरों से लाई गई मिट्टी शामिल की गई है, जो इसे राष्ट्रीय एकता और बलिदान का प्रतीक बनाते हैं।
अग्निवीरों को मिलेगी सरकारी सेवाओं में प्राथमिकता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में राज्य सरकार ने यह तय किया है कि अग्निवीरों को पुलिस, परिवहन, वन और अन्य विभागों में सेवायोजन दिया जाएगा। इसके लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में रखा जाएगा।
सैनिक और शहीद परिवारों के लिए बड़े फैसले:
1. बलिदानी स्वजन को अनुग्रह राशि: ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख
2. परमवीर चक्र विजेताओं की राशि: ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹1.5 करोड़
3. वीरता पुरस्कार विजेताओं को बढ़ी हुई एकमुश्त राशि
वीरांगनाओं और बेटियों को मिला रोजगार का नया रास्ता
सरकार ने एक नया कदम उठाते हुए पूर्व सैनिक वीरांगनाओं और पुत्रियों को ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में रोजगारपरक प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है, जिससे वे तकनीकी दक्षता के साथ स्वावलंबी बन सकें।
रोजगार और रियायतें:
1.बलिदानी परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, अब तक 37 आश्रितों को नियुक्ति
2. आवेदन की अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष
3.वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों को उत्तराखंड रोडवेज में निःशुल्क यात्रा सुविधा
4. सेवारत/पूर्व सैनिकों को 25 लाख तक की संपत्ति खरीद पर स्टांप ड्यूटी में 25% छूट
मुख्यमंत्री धामी ने कहा – “हमारा संकल्प है कि हर सैनिक और उनका परिवार सम्मान के साथ जीए। सैन्य धाम न केवल बलिदान की स्मृति है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र भी होगा।“

