पीटीआई: आंध्र प्रदेश में 30 साल से फर्जी नाम से छिपकर रह रहे मोस्ट वांटेड आतंकियों अबूबकर सिद्दीकी और मोहम्मद अली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर देशभर में हुए कई बम धमाकों में शामिल होने और नई साजिश की तैयारी का आरोप है। पुलिस ने इनके पास से 20 किलो विस्फोटक बरामद किया है, जिससे कई शहरों में धमाके किए जा सकते थे।
20 किलो विस्फोटक और बम बनाने का सामान बरामद
पुलिस ने बताया कि बरामद विस्फोटक से 50-60 आईईडी या 8-10 हाई पावर सूटकेस बम बनाए जा सकते थे, जिनकी तबाही की ताकत 30 मीटर तक के दायरे में होती। बरामद सामान में घड़ी के स्विच, डिजिटल टाइमर, वॉकी-टॉकी, दूरबीन, हेकिंग सॉफ्टवेयर, खंजर और दरांती भी शामिल हैं। इसके अलावा ISIS से प्रेरित साहित्य और भारतीय शहरों के नक्शे भी बरामद किए गए हैं।
नाम बदलकर व्यापारी बनकर रह रहे थे
अबूबकर अमानुल्लाह खान और मोहम्मद अली मंसूर नाम से आंध्र प्रदेश के रायचोटी में छोटे व्यापारी बनकर रह रहे थे। दोनों ने शादी भी कर ली थी और परिवार के साथ सामान्य जिंदगी दिखा रहे थे ताकि कोई उन पर शक न कर सके। पुलिस ने बताया कि दोनों ने स्थानीय स्तर पर विस्फोटक और बम बनाने का सामान खरीदा ताकि डिजिटल ट्रेस न छोड़ा जा सके।
रामेश्वरम कैफे जैसे हमले की थी तैयारी
पुलिस का मानना है कि दोनों आतंकी रामेश्वरम कैफे विस्फोट जैसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। इससे पहले भी अबूबकर और अली पर 1995 के कोयंबटूर, 1999 कासरगोड ट्रेन विस्फोट और 2013 मल्लेश्वरम विस्फोट जैसे मामलों में शामिल होने का आरोप है। 2011 में इन्होंने आडवाणी की रथयात्रा में पाइप बम लगाने की भी साजिश रची थी।
गिरफ्तारी में पत्नियों ने किया विरोध
गिरफ्तारी के दौरान आतंकियों की पत्नियों सायरा बानू और शेख शमीम ने पुलिस पर हमला कर जांच में बाधा डालने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने दोनों महिलाओं को भी गिरफ्तार कर कडप्पा जेल भेज दिया है। उनके घरों की तलाशी में विस्फोटक के अलावा संदिग्ध लेन-देन और फंडिंग से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।
अभी जेल में, आगे होगी पूछताछ
रायचोटी पुलिस स्टेशन में विस्फोटक अधिनियम, शस्त्र अधिनियम, UAPA और IPC की धारा 132 के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल दोनों आतंकी तमिलनाडु की जेल में बंद हैं। आंध्र प्रदेश पुलिस इनसे पूछताछ कर इनके पूरे आतंकी नेटवर्क, फंडिंग और अन्य साजिशों का पता लगाने के लिए पूछताछ करेगी ताकि देश में किसी बड़ी आतंकी घटना को रोका जा सके।

