Site icon The Mountain People

आपातकाल के 50 साल: संघ की मांग – हटें संविधान से ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द, राहुल गांधी से माफी की भी मांग

 

 

 

TMP: आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने उस दौर की राजनीति और उससे जुड़े संवैधानिक बदलावों को लेकर बड़ा बयान दिया है। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने 1976 में आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द जोड़कर मूल संविधान की आत्मा से छेड़छाड़ की थी। उन्होंने इन्हें हटाने की आवश्यकता जताई।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित ‘इमरजेंसी के 50 साल’ कार्यक्रम में बोलते हुए होसबाले ने कहा कि जब देश में मौलिक अधिकारों का गला घोंटा गया, तब इन शब्दों को जोड़ना एक पक्षपातपूर्ण निर्णय था। उनके अनुसार, डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान की मूल प्रस्तावना में ये शब्द शामिल नहीं थे।

संघ की प्रमुख बातें:

  • संविधान की मूल भावना पर लौटने की मांग।

  • ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्दों को हटाने पर फिर से विचार की ज़रूरत।

  • आपातकाल के दोषियों से देश से माफी की मांग।

होसबाले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जो लोग आज संविधान की प्रति लेकर घूम रहे हैं, उन्होंने आपातकाल के लिए देश से कभी माफी नहीं मांगी। उन्हें यह करना ही होगा।”

उन्होंने बताया कि आपातकाल के दौरान:

  • एक लाख से अधिक लोगों को जेल में डाला गया,

  • 250 से अधिक पत्रकार गिरफ्तार किए गए,

  • 60 लाख लोगों को जबरन नसबंदी के लिए मजबूर किया गया।

गडकरी का राहुल पर तंज

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज संविधान की दुहाई दे रहे हैं, वे भूल जाते हैं कि उनकी ही पार्टी ने संविधान की सबसे बड़ी अनदेखी आपातकाल में की थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब सिर्फ इमरजेंसी को याद करने से नहीं चलेगा, बल्कि उसकी वजहों को समझना और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने की व्यवस्था करना होगा।

आपातकाल के 50 साल बाद एक बार फिर इस पर राजनीतिक और वैचारिक बहस तेज हो गई है। क्या संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द हटने चाहिए? यह आने वाले समय की राजनीति और संसद में चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है।

 
Exit mobile version