अंकिता को मिला इंसाफ, उत्तराखंड में अब अन्याय नहीं—CM धामी का स्पष्ट संदेश: बेटियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

 

 



देहरादून: उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को आखिरकार न्याय मिल गया। बहुचर्चित हत्याकांड मामले में अदालत के फैसले के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ शब्दों में कहा कि “बेटियों के साथ अन्याय अब सहन नहीं किया जाएगा। हमने पहले ही तय किया था कि इस घटना को सिर्फ एक केस की तरह नहीं, बल्कि एक नज़ीर की तरह लिया जाएगा, ताकि दोबारा ऐसा दुःसाहस कोई न कर सके।”

मुख्यमंत्री ने भावुक अंदाज़ में कहा कि अंकिता के साथ हुई यह बर्बरता केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड का घाव था। “हम चाहते हैं कि राज्य की हर बेटी बिना डर के अपने सपने साकार करे। जो लोग बेटियों के सम्मान को ठेस पहुंचाएंगे, उनके लिए न समाज में जगह है, न उत्तराखंड की धरती पर।”

इस बयान को एक नीतिगत बदलाव की चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, जो यह स्पष्ट करता है कि महिला सुरक्षा अब केवल एक एजेंडा नहीं, राज्य की प्राथमिकता है।

पृष्ठभूमि:

अंकिता भंडारी, जो एक रिसॉर्ट में कार्यरत थीं, उनकी हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मामले को लेकर जनता में तीव्र आक्रोश था और लगातार न्याय की मांग उठ रही थी। अब जबकि कोर्ट का फैसला आ चुका है, यह उम्मीद जगी है कि उत्तराखंड में महिला सुरक्षा को लेकर एक सख्त और संवेदनशील व्यवस्था विकसित होगी।

मुख्यमंत्री का संदेश:

सीएम धामी का यह बयान केवल संवेदना नहीं, बल्कि एक कड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है—उत्तराखंड में अब बेटियों के साथ अन्याय करने वालों को कानून के साथ-साथ समाज का भी कठोर प्रतिरोध झेलना होगा।

अंकिता भंडारी को मिला न्याय केवल एक केस का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है—एक ऐसे समाज की, जहां बेटियाँ सुरक्षित, सशक्त और सम्मानित महसूस करें।

 
 
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